Coldref Cough Syrup Case: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा कोर्ट ने उस डॉक्टर की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिसने कथित तौर पर कई बच्चों की मौत का कारण बने Coldref Cough Syrup को लिखने का काम किया था। डॉ. प्रवीण सोनी जो एक बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) हैं, उन्हें हाल ही में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
कोर्ट ने माना आरोप गंभीर, जांच अधूरी
परासिया सिविल कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज गौतम कुमार गुजरे ने अपने 8 अक्टूबर के आदेश में कहा कि मामले की जांच अभी अधूरी है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। अदालत ने जमानत से इनकार करते हुए कहा कि डॉ. सोनी ने स्वास्थ्य विज्ञान महानिदेशालय की गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए 4 साल से कम उम्र के बच्चों को यह सिरप लिखी थी, जबकि इसे उस आयु वर्ग के लिए प्रतिबंधित माना गया था।
कफ सिरप से 24 बच्चों की मौत
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Coldref Cough Syrup पीने से कम से कम 24 बच्चों की मौत हुई थी। राज्य सरकार ने इस त्रासदी की जांच के लिए SIT का गठन किया है। इस मामले में तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक गोविंदन रंगनाथन को भी गिरफ्तार किया गया है। सिरप में विषाक्त Diethylene Glycol की अधिक मात्रा पाई गई थी, जो बच्चों की मौत का कारण बनी।
IMA ने की गिरफ्तारी की निंदा
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने डॉक्टर प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा है कि “दवा में मिलावट या विषाक्तता के लिए जिम्मेदार निर्माता और सरकारी एजेंसियां हैं, डॉक्टर नहीं।” आईएमए ने कहा कि डॉक्टर ने वही दवा लिखी जो केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा पहले से मंजूर और अनुशंसित थी।
डॉ. सोनी के वकील ने अदालत में कहा कि वह एक सरकारी डॉक्टर हैं और पिछले 35-40 सालों से सेवा दे रहे हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि डॉक्टर को झूठे आरोप में फंसाया गया है क्योंकि उन्होंने सिर्फ इलाज के लिए दवा लिखी थी। दवा की गुणवत्ता या उसमें मिलावट के लिए पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होती है।
पुलिस का दावा
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि डॉ. सोनी को यह दवा लिखने के लिए 10 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था और उनके रिश्तेदारों की मेडिकल दुकान पर यही सिरप बेची जा रही थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि अभी जांच अधूरी है और आरोप गंभीर हैं, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।


















