मध्य प्रदेश और राजस्थान में दूषित कफ सिरप (Contaminated Cough Syrup) पीने से बच्चों की हुई मौतों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मंगलवार को शीर्ष अदालत में अधिवक्ता विशाल तिवारी ने एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर इन घटनाओं की सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि सभी राज्यों में दर्ज एफआईआर और चल रही जांचों को एक जगह समेकित कर सीबीआई के हवाले किया जाए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके।
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में एक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित की जाए, जो इस पूरे प्रकरण की निगरानी करे। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अलग-अलग राज्यों की जांचों के चलते जवाबदेही बिखर गई है, जिससे बार-बार लापरवाही हो रही है और खतरनाक सिरप बाजार में पहुंच जा रहे हैं। साथ ही पूरे देश में दूषित सिरप की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई है।
इसके अलावा केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि किसी भी सिरप या दवा की बिक्री या निर्यात से पहले उन्हें एनएबीएल (NABL) मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में टेस्ट किया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह कदम भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में मददगार साबित होगा।
यह मामला तब सामने आया जब मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में दूषित कफ सिरप पीने से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 16 हो गई। पूरे प्रदेश में अब तक 19 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। इस घटना के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल स्टोर्स की जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

















